नई दिल्ली: अभी तक आपको पता चल चुका होगा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने टैरिफ से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने भारत से निर्यात होने वाली कुछ खास दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने की बात कही है। यह टैरिफ उन दवाओं पर लगेगा जिनका पेटेंट हो चुका है। यह नियम आगामी 1 अक्टूबर से लागू हो सकता है। इससे भारत की दवा कंपनियों पर संभावित असर को देखते हुए शेयर बाजार में फार्मा शेयर लुढ़क गए हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत अमेरिका को बहुत सारी दवाएं भेजता है।क्या कहना है ट्रम्प का
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि अगर दवा कंपनियां अमेरिका में प्लांट नहीं लगाती हैं, तो उन्हें ये टैक्स भरना होगा। उल्लेखनीय है कि अमेरिका हर साल लगभग $233 बिलियन की दवाएं दूसरे देशों से खरीदता है। अगर दवाओं के दाम दोगुने हो जाएंगे, तो अमेरिका के लोगों को परेशानी हो सकती है। क्योंकि तब उन्हें अपनी सेहत पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। ट्रम्प के इस फैसले से वहां की Medicare और Medicaid जैसी योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।जो कहा था कर दिया
आपको याद दिला दें कि डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले ही कहा था कि टैरिफ धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा, ताकि कंपनियों को फैक्ट्रियां बनाने और अपना काम शिफ्ट करने का समय मिल जाए। लेकिन अब उन्होंने अचानक से 100% टैरिफ लगाने की बात कह दी है। इससे कई लोगों को हैरानी भी हुई है।
भारत है दुनिया की फार्मेसी
भारत को "दुनिया की फार्मेसी" कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत दुनिया भर में जेनेरिक दवाएं बनाने में बहुत आगे है। आपको मालूम ही होगा कि जेनेरिक दवाएं वो होती हैं जो सस्ती होती हैं और जिनका फार्मूला कोई भी कंपनी इस्तेमाल कर सकती है। इस समय दुनिया भर में जितनी भी जेनेरिक दवाएं बनती हैं, उनमें से 20% भारत में बनती हैं। इसके अलावा, भारत 60% वैक्सीन भी बनाता है। अमेरिका के FDA (Food and Drug Administration) ने भारत में सबसे ज्यादा दवा बनाने वाले प्लांट्स को मंजूरी दी है।भारत का कितना है दवा निर्यात
FY25 (अप्रैल से दिसंबर) के दौरान, भारत ने ₹1.87 लाख करोड़ ($21.7 बिलियन) की दवाएं दूसरे देशों को भेजीं। इनमें से सबसे ज्यादा दवाएं अमेरिका, यूके या ग्रेट ब्रिटेन, साउथ अफ्रीका, नीदरलैंड और फ्रांस को भेजी गईं। साल 2024-25 में, भारत ने पूरी दुनिया में $30 बिलियन से ज्यादा की दवाएं बेचीं।
अमेरिका है सबसे बड़ा खरीदार
बीते साल अमेरिका भारत से दवाएं खरीदने वाला सबसे बड़ा देश रहा। साल 2024-25 में, भारत ने जितनी भी दवाएं दूसरे देशों को भेजीं, उनमें से 31% दवाएं अमेरिका को भेजी गईं। भारत ने 2024 में अमेरिका को $3.6 बिलियन की दवाएं भेजीं। इस साल यानी 2025 के पहले छह महीनों में ही भारत ने अमेरिका को $3.7 बिलियन की दवाएं भेज दीं हैं। हालांकि, अभी ट्रम्प ने कहा है कि यह टैक्स सिर्फ पेटेंट वाली दवाओं पर लगेगा। लेकिन लोगों को डर है कि इसका असर भारत से आने वाली जेनेरिक दवाओं और स्पेशल दवाओं पर भी पड़ सकता है। यदि ऐसा हुआ तो फिर भारतीय दवा कंपनियां भी इस लपेटे में आएंगी।
इन कंपनियों का खूब है निर्यात
भारत की Dr Reddy's, Sun Pharma, Lupin और Aurobindo जैसी दवा कंपनियों ने अमेरिका में सस्ती जेनेरिक दवाएं बेचकर ही अपना नाम बनाया है। आपको बता दें कि अमेरिका में जितनी भी दवाएं लिखी जाती हैं, उनमें से 90% जेनेरिक दवाएं होती हैं। लेकिन इन दवाओं पर अमेरिका के हेल्थकेयर बजट का सिर्फ 1.2% ही खर्च होता है। भारत से जो दवाएं बाहर भेजी जाती हैं, उनमें से 75% दवाएं और बायोलॉजिक्स होती हैं। अगर टैक्स को पेटेंट वाली दवाओं से आगे बढ़ाया गया, तो इसका असर दवा बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ अमेरिका के उन मरीजों पर भी पड़ेगा जो सस्ती भारतीय दवाओं पर निर्भर हैं।