क्या होती हैं जेनरिक दवाइयां
जेनरिक दवाइयां वे दवाइयां होती हैं जिन्हें बनाने के लिए किसी भी कंपनी के पास पेटेंट यानी एकाधिकार नहीं होता है। इन दवाइयों को कोई भी कंपनी बना सकती है। पेटेंट न होने के कारण इन दवाइयों पर कंपनी की ओर से कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाता जिसके कारण ये काफी सस्ती मिल जाती हैं। इनका असर वही होता है जो किसी ब्रांडेड कंपनी की दवाई का होता है। अगर कैंसर की कोई दवाई एक हजार रुपये की मिल रही है तो हो सकता है कि ऐसी जेनरिक दवाई मात्र 100 रुपये में मिल जाए। 100 रुपये वाली दवाई वही असर करेगी जो एक हजार रुपये वाली करेगी।
जेनरिक दवाइयां वे दवाइयां होती हैं जिन्हें बनाने के लिए किसी भी कंपनी के पास पेटेंट यानी एकाधिकार नहीं होता है। इन दवाइयों को कोई भी कंपनी बना सकती है। पेटेंट न होने के कारण इन दवाइयों पर कंपनी की ओर से कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाता जिसके कारण ये काफी सस्ती मिल जाती हैं। इनका असर वही होता है जो किसी ब्रांडेड कंपनी की दवाई का होता है। अगर कैंसर की कोई दवाई एक हजार रुपये की मिल रही है तो हो सकता है कि ऐसी जेनरिक दवाई मात्र 100 रुपये में मिल जाए। 100 रुपये वाली दवाई वही असर करेगी जो एक हजार रुपये वाली करेगी।



