नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2022 में भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) को बेचने की तैयारी की थी। लेकिन अब उसने इस योजना को त्याग दिया है। इंडियन ऑयल के बाद बीपीसीएल देश की दूसरी सबसे ऑयल मार्केटिंग कंपनी है। कंपनी की मुंबई, कोच्चि और मध्य प्रदेश में रिफाइनरीज है। रिफाइनिंग कैपेसिटी के मामले में यह रिलायंस और इंडियन ऑयल के बाद देश की तीसरी बड़ी कंपनी है। इस कंपनी ने सरकार को डिविडेंड किस्त के रूप में लगभग 2,413 करोड़ रुपये दिए हैं। चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक सरकारी कंपनियां लाभांश के रूप में सरकार को 15,389.14 करोड़ रुपये दे चुकी हैं।
निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने सोमवार को कहा कि सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी बीपीसीएल से करीब 2,413 करोड़ रुपये का लाभांश मिला है। दीपम सचिव तुहिन कांत पांडेय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सरकार को लाभांश किस्त के रूप में बीपीसीएल से लगभग 2,413 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक केंद्रीय लोक उपक्रमों से लाभांश के रूप में 15,389.14 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें आईओसी से 5,091 करोड़ रुपये, इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से 40 करोड़, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन से 554 करोड़ और टेलीकॉम कंसल्टेंट्स इंडिया लि. (टीसीआईएल) से विशेष लाभांश के रूप में 3,443 करोड़ रुपये शामिल हैं।
कितना है डिविडेंड टारगेट
सरकार ने बजट में चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से लाभांश के रूप में 56,260 करोड़ रुपये प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। यह वित्त वर्ष 2023-24 के लिए निर्धारित 50,000 करोड़ रुपये से अधिक है। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने पिछले सप्ताह वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 3,662.17 करोड़ रुपये का लाभांश दिया था। यह राशि मार्च, 2024 में एलआईसी से प्राप्त 2,441.45 करोड़ रुपये के अंतरिम लाभांश के अलावा है। तेल की कीमतों में गिरावट से सोमवार को एचपीसीएल और बीपीसीएल के शेयर 52 हफ्ते के टॉप पर पहुंच गए।