क्या होता है KYC
केवाईसी का फुल फॉर्म होता है नो योर कस्टमर। दरअसल, KYC एक संस्थान को एक निवेशक की पहचान और पते को प्रमाणित करने में सक्षम बनाता है। किसी ग्राहक को म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉज़िट, बैंक अकाउंट आदि में निवेश शुरू करने से पहले अपना KYC जमा करना होता है। हालांकि, किसी व्यक्ति को केवल एक बार ऐसा करना होता है जब वह पहली बार निवेश करना शुरू करता है।
कब से शुरू हुआ केवाईसी
भारत में वर्ष 2002 में KYC अस्तित्व में आया। रिजर्व बैंक ने वर्ष 2004 में सभी बैंकों के लिए इसे अनिवार्य कर दिया। उस समय दिसंबर 2005 तक ग्राहकों का KYC कराने की छूट दी गई थी।



