नई दिल्ली: रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ पृथ्वी खनिज) को लेकर चीन काफी अकड़ दिखा रहा है। इसके निर्यात पर चीन ने रोक लगा रखी है। भारत और अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में इनकी भारी मांग है। इनसे बनने वाले मैग्नेट की कमी से देश की कई इंडस्ट्री का काम रुक सकता है। चीन की अकड़ निकालने का अब भारत ने प्लान बना लिया है।भारत सरकार दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक योजना बना रही है। यह योजना लगभग 3500 से 5000 करोड़ रुपये की है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस योजना को जल्द ही मंजूरी मिल सकती है। अधिकारी ने कहा, 'हमारी प्राथमिकता है कि देश में महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन जल्द से जल्द शुरू हो।'क्या है सरकार का प्लान?
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार इस योजना के तहत सरकार कंपनियों को प्रोत्साहन देगी। यह प्रोत्साहन रिवर्स नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से दिया जाएगा। मतलब जो कंपनी सबसे कम कीमत पर प्रोडक्शन करने को तैयार होगी, उसे यह प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार ने यह फैसला चीन से होने वाले आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए किया है।अधिकारी ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कम से कम पांच बड़ी भारतीय कंपनियों ने सरकार के साथ बातचीत में इन खनिजों का उत्पादन करने में रुचि दिखाई है।अभी चीन का एकाधिकार
चीन का दुर्लभ पृथ्वी मैग्नेट (rare earth magnets) की आपूर्ति पर लगभग एकाधिकार है। चीन ने इनके निर्यात पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए हैं। ये खनिज कार, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और नवीकरणीय ऊर्जा के बुनियादी ढांचे के लिए बहुत जरूरी हैं। ऑटोमोबाइल उद्योग ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। अप्रैल में, चीन ने सात दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और संबंधित मैग्नेट के निर्यात के लिए विशेष लाइसेंस अनिवार्य कर दिया था।भारत में जबरदस्त मांग
भारत में ईवी और पवन टरबाइन बनाने वाली कंपनियां दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की सबसे बड़ी उपभोक्ता हैं। साल 2025 में देश की कुल मांग का आधा से ज्यादा हिस्सा इन्हीं कंपनियों का होगा। अनुमान है कि साल 2030 तक यह मांग बढ़कर 8220 मीट्रिक टन हो जाएगी। अभी यह मांग 4010 मीट्रिक टन है।सरकार का यह भी है प्लान
सरकार खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में भी संशोधन करने की योजना बना रही है। इससे महत्वपूर्ण खनिज मिशन को मदद मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक देश में दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने हैदराबाद की कंपनी मिडवेस्ट एडवांस्ड मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड को फंडिंग भी दी है।