नई दिल्ली: बिहार को विधान चुनाव से पहले केंद्र सरकार की ओर से दो बड़े इंफ्रा प्राेजेक्ट मिले हैं। इनकी लागत 7616 करोड़ रुपये है। इनमें पहला प्रोजेक्ट राजमार्ग का है और दूसरा रेलमार्ग का। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में इन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई।अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी
कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधिक करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन प्रोजेक्ट की जानकारी दी। आज जिन प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली, उनमें पहला प्रोजेक्ट मोकामा से मुंगेर के बीच का है। यह सड़क मार्ग प्राेजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट पर 4447 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं दूसरा प्रोजेक्ट भागलपुर से दुमका होते हुए रामपुरहाट तक रेलवे लाइन की डबलिंग। इस प्रोजेक्ट में 3169 करोड़ रुपये खर्च होंगे।मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड सेक्शन
यह बक्सर-भागलपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर ग्रीनफील्ड सेक्शन है। यह 4 लेन का कॉरिडोर है। कुल प्रोजेक्ट की लंबाई 82.40 किमी लंबा होगा। यह सेक्शन मोकामा, बड़हिया, लखीसराय, जमालपुर, मुंगेर से होते हुए भगलपुर को कनेक्ट करेगा। इस पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ सकेंगे।बिहार सरकार ने किया स्वागत
बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा "हम केंद्र सरकार का धन्यवाद करते हैं कि बिहार में बक्सर-भागलपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के अंतर्गत 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड मोकामा–मुंगेर खंड के निर्माण को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना न केवल यात्रा समय को घटाकर 1.5 घंटे कर देगी, बल्कि इस कॉरिडोर से जुड़े मोकामा, बड़हिया, लखीसराय, जमालपुर, मुंगेर और भागलपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को भी बढ़ावा देगी, जिससे रोजगार, आर्थिक वृद्धि और क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। यह इस क्षेत्र के लोगों की एक लंबे समय से चली आ रही मांग की पूर्ति है। डबल इंजन की सरकार बिहार के विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।"भागलपुर-दुमका प्रोजेक्ट
इसी बैठक में जो भागलपुर-दुमकार रेलवे लाइन के दोहरीकरण की योजना को मंजरी दी गई, वह रेल लाइन प्रोजेक्ट 3 राज्यों के 5 जिलों से होकर गुजरेगा। यह लाइन डबल होगी। इसके शुरू होने से भारतीय रेलवे का नेटवर्क 177 किमी और बढ़ जाएगा। इससे करीब 29 लाख लोग कनेक्ट होंगे। साथ ही इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से देवघर (बाबा वैद्यनाथ धाम) और तारापीठ (शक्तिपीठ) जाने वाले तीर्थयात्रियों को भी फायदा होगा।