अमेरिकी 'उड़ते टैंक' अपाचे पर क्यों दांव लगा रहे भारत और इजरायल? यूक्रेनी ड्रोन के आगे धाराशाई हो रहे रूसी हेलीकॉप्टर

Updated on 09-02-2026 12:33 PM
तेल अवीव/नई दिल्ली: आधुनिक युद्ध में ड्रोन हमलों के सामने हेलीकॉप्टर की कमजोरियां सामने आ गई है। फिर भी इजरायल और भारत जैसे देश अमेरिकी अपाचे हमलावर हेलीकॉप्टर्स पर बड़ा दांव लगा रहे हैं। अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) के मुताबिक, अमेरिका ने 30 जनवरी 2026 को इजरायल को AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों और संबंधित उपकरणों के लिए संभावित 3.8 बिलियन डॉलर की विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी दी है। इजरायल, अमेरिका से 30 बोइंग AH-64E हेलीकॉप्टर, 70 इंजन, सोफिस्टिकेटेड नाइट-विजन और टारगेटिंग सिस्टम, रडार समेत दूसरे कंपोनेंट्स खरीदने जा रहा है।

इजरायली अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका के अपाचे हेलीकॉप्टर, इजरायल एयरफोर्स के आधुनिकीकरण के लिहाज से बड़ा कदम है। इजरायल, अमेरिका से उस वक्त अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदने की कोशिश कर रहा है, जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष छिड़ने का खतरा बना हुआ है। ऐसे वक्त में अमेरिका की तरफ से डिफेंस डील को मंजूरी मिलना काफी दिलचस्प है। क्योंकि अमेरिका जानता है कि ड्रोन और MANPADS (मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम) से हेलीकॉप्टर्स को भारी खतरा है।
हमलावर हेलीकॉप्टर्स को आधुनिक युद्ध में क्यों खतरा है?
हमलावर हेलीकॉप्टर्स को जमीन के करीब कम ऊंचाई पर उड़ना पड़ता है। ऐसे में वे दुश्मनों के निशाने पर काफी ज्यादा आ जाते हैं। जैसे यूक्रेन संघर्ष में रूसी अटैक हेलीकॉप्टरों को काफी नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि MANPADS और SHORAD (शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस) हथियारों के सामने हेलीकॉप्टर 'शानदार बत्तख' हैं। हालांकि भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने पिछले दिनों यूरेशियन टाइम्स में लिखे अपने एक लेख में कहा था कि "हमलावर हेलीकॉप्टरों के गायब न होने का मुख्य कारण यह है कि वे एक ऐसी जगह भरते हैं, जिसे बहुत कम प्लेटफॉर्म भर सकते हैं। वे एकमात्र 350 KMPH मिसाइल वाहक हैं जो पेड़ों के पीछे छिप सकते हैं, ऊपर आ सकते हैं, और गोली चलाकर भाग सकते हैं।"एयर मार्शल चोपड़ा ने आगे लिखा था कि "अपाचे हेलीकॉप्टर अभी भी सेनाओं के लिए सबसे ज्यादा 'जिंदा रहने वाले' कुशल और जबरदस्त फ्लाइंग एंटी-टैंक प्लेटफॉर्म हैं। एंटी-UAV और एंटी-अटैक हेलीकॉप्टर के तौर पर भी इनकी अहम भूमिका है।" इजरायल ने AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदने के पीछे हमास के खिलाफ युद्ध का हवाला दिया है। उनका कहना है कि हेलीकॉप्टर्स से हमास के आतंकियों की पहचान करने और काफी नजदीक से सटीक हमला करने में काफी आसानी हुई है। उनका कहना है कि जमीनी सेना की मदद करने में भी ऐसे हेलीकॉप्टर शानदार भूमिका निभाते हैं।
इजरायल खरीद रहा अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर
इजरायली वायुसेना के पास अभी बोइंग AH-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर के दो मुख्य वेरिएंट हैं। पुराना AH-64A, जिसे उसे 1990 के दशक में मिलना शुरू हुआ था और दूसरा AH-64D, जो एडवांस्ड रडार और एवियोनिक्स वाला लॉन्गबो वेरिएंट है। नए सिस्टम की तुलना में इन पुराने वेरिएंट में एंड्योरेंस, पेलोड, सेंसर रेंज, आधुनिक खतरों के सामने सर्वाइवेबिलिटी और ओवरऑल परफॉर्मेंस में कमियां हैं। इजराइली अधिकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि पिछले दो सालों के युद्धों के अनुभव ने ज्यादा जीवित रहने की क्षमता, ज्यादा पेलोड, लंबी रेंज और जमीनी सेना के साथ बेहतर तालमेल की जरूरत को फिर से साबित किया है और ये सब अपाचे AH-64E में मिलता है।

भारत ने भी लगाया है अपाचे हेलीकॉप्टर पर दांव
भारतीय सेना ने 2020 में अमेरिका से 6 अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए 600 मिलियन डॉलर की डील की थी। अपाचे का पहला बैच शुरू में मई-जून 2024 तक भारत आने वाला था, लेकिन इसमें काफी देरी हुई और आखिरकार जुलाई 2025 में अमेरिका ने डिलीवरी देनी शुरू कर दी। दिसंबर 2025 में बाकी के 3 हेलीकॉप्टर भी भारत को मिल गये हैं। भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही 22 अपाचे हेलीकॉप्टर हैं। वायुसेना ने अपाचे AH-64E का पहला बैच पठानकोट एयर फोस स्टेशन पर और दूसरा बैच असम के जोरहाट में शामिल किया है।

इस हेलीकॉप्टर में दो इंजन हैं और यह हर मौसम, दिन या रात के ऑपरेशन के लिए सेंसर से लैस है। वायुसेना इसे एक प्रमुख हमलावर हथियार मानती है। यह स्टिंगर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से दूसरे विमानों और हेलीकॉप्टरों को नष्ट कर सकता है। इसमें 30mm दूध की बोतल के आकार के तोप के 1200 राउंड गोला-बारूद से दो किलोमीटर दूर के टारगेट पर हमला करने की क्षमता है। इसके अलावा ये हेलीकॉप्टर दस किलोमीटर दूर के टारगेट पर हेलफायर मिसाइल और हाइड्रा रॉकेट दाग सकता है।


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