जब सऊदी अरब ने पीएम मोदी को दिया था 'किंग अब्दुल अजीज सैश' सम्मान, अब पाकिस्तान से दोस्ती की वजह क्या है?

Updated on 23-09-2025 01:01 PM
नई दिल्ली: पाकिस्तान के साथ बढ़ती सऊदी अरब की नजदीकी ने भारत के कान खड़े कर दिए हैं। दोनों देशों ने हाल ही में जो समझौता किया है, उसे भारत के लिए एक झटका माना जा रहा है। इस समझौते के तहत अगर किसी भी एक देश पर हमला होता है तो उसे दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। अब यह सवाल उठ रहे हैं कि सऊदी अरब को अचानक ऐसा क्या हुआ, जो उसने भारत के साथ संबंधों को दरकिनार करते हुए पाकिस्तान के साथ इतनी बड़ी संधि कर ली। आइए जानते हैं...

सऊदी अरब के साथ भारत के रिश्ते हमेशा से अच्छे रहे हैं। हिंदुस्तान ने 1947 में अपनी आजादी के कुछ समय बाद ही सऊदी सरकार के साथ अपने राजनयिक संबंध स्थापित कर लिए थे। साल दर साल इनमें सुधार ही होता रहा। 2014 में मोदी सरकार आने के बाद भारत और सऊदी अरब के रिश्तों में जबरदस्त गर्मजोशी नजर आई। मोदी सरकार के सत्ता में काबिज होने के 2 साल बाद यानी साल 2016 में ही सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने यहां आमंत्रित किया।

भारत के लिए माना जा रहा बड़ा झटका

आमंत्रण को स्वीकार करते हुए पीएम मोदी अप्रैल 2016 में सऊदी अरब के 2 दिवसीय दौरे पर पहुंचे और वहां उनका भव्य स्वागत किया गया। सऊदी सरकार ने अपने सर्वोच्च सम्मान किंग अब्दुल अजीज सैश से पीएम मोदी को सम्मानित किया। तब से लेकर अब तक ज्यादातर मौकों पर सऊदी अरब ने भारत और पाकिस्तान में से हमेशा भारत के साथ संबंधों को तरजीह दी है। लेकिन हाल ही में सऊदी अरब ने एक ऐसा कमद उठाया है, जिसे भारत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है

कतर पर हमले के बाद डर का माहौल

पाकिस्तान और सऊदी अरब की नजदीकियां बढ़ने का कारण भारत बिल्कुल भी नहीं है। सऊदी अरब भारत के साथ अपने रिश्ते खराब बिल्कुल भी नहीं करना चाहता है। सऊदी सरकार को तो बस मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए अपने देश को सुरक्षित रखने की चिंता है। दरअसल, चाहे सऊदी अरब हो या फिर दूसरा कोई भी खाड़ी देश सभी इस समय डर के माहौल में जी रहे हैं। अभी तक ज्यादातर खाड़ी देश ये सोचकर अपनी सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते थे कि उनके साथ आपात स्थिति के लिए अमेरिका खड़ा है और जब भी कोई देश उन पर हमला करने की कोशिश करेगा, अमेरिका उनके बचाव में आ खड़ा होगा। लेकिन हाल ही में कतर पर हुए इजरायली हमले ने अमेरिका के इस भरोसे को चकनाचूर कर दिया है।

और भी खाड़ी देश कर सकते हैं समझौता!

खाड़ी देश ये समझ चुके हैं कि इजरायल जब भी उन पर हमला करना चाहे आसानी से कर सकता है और ऐसी स्थिति में अमेरिका कभी उनकी सुरक्षा के लिए आगे नहीं आएगा। ऐसे में अब सभी गल्फ देश अपनी-अपनी सुरक्षा पुख्ता करने में लग गए हैं। पाकिस्तान के साथ समझौता करने पर उन्हें एक तरीके से परमाणु बम की सुरक्षा का भरोसा भी मिल जाता है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में और भी खाड़ी देश पाकिस्तान के साथ इस तरह का समझौता कर सकते हैं।

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