क्युरेटिव याचिका का तर्क
- सुरेंद्र कोली ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी क्युरेटिव याचिका में दलील दी थी कि जिस साक्ष्य (सबूत) के आधार पर उसे इस मामले में दोषी ठहराया गया था, वही साक्ष्य अन्य मामलों में अविश्वसनीय पाया गया था, जिनमें उसे बाद में बरी कर दिया गया।
- पीठ ने सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की थी कि यदि इस एकमात्र मामले में सजा को बरकरार रखा जाता है, जबकि अन्य सभी मामलों में समान साक्ष्यों के आधार पर वह बरी हो चुका है, तो यह एक विसंगतिपूर्ण स्थिति होगी।
- गौरतलब है कि यह कोली के खिलाफ आखिरी बची सजा थी। इससे पहले, जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों को खारिज कर दिया था, जिसमें कोली और उसके सह-अभियुक्त मोनिंदर सिंह पंधेर को निठारी हत्याकांड के अन्य मामलों में बरी किया गया था। यानी जुलाई में 14 मामलों में कोली को राहत मिल चुकी थी।



