दुर्गा प्रसाद सुबेदी अररिया जेल में भी रहे
फारबिसगंज अर्ध निर्मित हवाई पट्टी पर नेपाल एयरलाइंस की विमान हाईजैक मामले की केस की अररिया सिविल कोर्ट में पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता विनय कुमार ठाकुर बताते हैं कि दुर्गा प्रसाद सुबेदी अररिया जेल में भी रहे। राणाशाही के खिलाफ चल रहे हैं आंदोलन के फंडिंग को लेकर विमान का अपहरण किया गया था। प्लेन हाईजैक के समय नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व में आंदोलन चल रहा था। आंदोलनकारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे और इस जरूरत को पूरा करने के लिए दुर्गा प्रसाद द्विवेदी और उनके साथियों ने विमान हाईजैक किया था। लंबे समय तक यह केस चला बाद में नेपाल के अनुरोध पर भारत सरकार ने आपातकाल के दौरान दुर्गा प्रसाद सुबेदी को नेपाल के जेल से रिहा किया। दुर्गा प्रसाद सुबेदी के साथ सुशील कोइराला, चक्र प्रसाद बसोला, नारायण प्रसाद डूंगर, मनोहर बैरल,विनोद अर्याल और विरु तमांग प्लेन हाईजैक में शामिल थे।
राजशाही के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हिमालय की गोद में बसे नेपाल शुरू से ही आंदोलन की आग में जलता रहा है।70 के दशक में राजशाही के खिलाफ आंदोलन हुआ। 1996 में राजशाही के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन 10 वर्षों की हिंसा और और अस्थिरता के बीच रही। 1996 से 2006 तक माओवादी आंदोलन नेपाल में हुए। माओवादी आंदोलन समाप्त होने के बाद 2007 में मधेशी आंदोलन की आग में नेपाल तपा। इससे पहले 1 जून 2001 को काठमांडू के नारायणहिती पैलेस में साप्ताहिक शाही भोज के दौरान सैनिक वर्दी में क्राउन प्रिंस दीपेंद्र शाह ने अपने ही परिवार के सदस्यों पर गोलियां चला दी और उसके बाद खुद को गोली मार ली।
इस नरसंहार में राजा वीरेंद्र वीर विक्रम शाह, रानी ऐश्वर्या, राजकुमार निरंजन,राजकुमारी श्रुति सहित परिवार के सात सदस्यों की मौत हो गई। वहीं नरसंहार के जिम्मेदार दीपेंद्र शाह की भी तीन दिनों के बाद मौत हो गई। 2005 में राजा ज्ञानेंद्र ने निर्वाचित सरकार को भंग कर खुद सत्ता संभाला। लेकिन 2006 में जन आंदोलन के कारण 24 अप्रैल 2006 को राजा ज्ञानेंद्र को सत्ता छोड़नी पड़ी और लोकतंत्र बहाल हुआ। 2007 में नेपाल हिंदू राष्ट्र से धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित हुआ। 28 में 2008 को नेपाल की संविधान सभा ने औपचारिक रूप से नेपाल में राजशाही को समाप्त की घोषणा की और नेपाल संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
240 साल पुरानी राजशाही का अंत
240 साल पुरानी राजशाही का अंत, शाही परिवार का नरसंहार, लोकतंत्र की स्थापना के बाद लोकतंत्र के राह में आई चुनौती का गवाह नेपाल रहा। ऐसे में एक बार फिर आंदोलन के बाद तख्तापलट का गवाह बने नेपाल में अंतरिम प्रधानमंत्री बनी पूर्व न्यायाधीश सुशीला कार्की की चुनौती कम नहीं है।



