मानव मल-मूत्र और कचरे पर माइक्रोसॉफ्ट का 14,690 करोड़ का दांव, वजह कर देगी हैरान

Updated on 25-07-2025 12:56 PM
नई दिल्‍ली: दिग्‍गज आईटी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अनूठा तरीका अपनाने का फैसला किया है। यह तरीका ह्यूमन वेस्‍ट यानी मानव अपशिष्ट (मानव मल-मूत्र) से जुड़ा है। माइक्रोसॉफ्ट स्टार्टअप कंपनी 'वॉल्टेड डीप' के साथ 12 साल का समझौता कर रही है। इस समझौते के तहत माइक्रोसॉफ्ट 49 लाख टन जैविक कचरा खरीदेगी। इस कचरे में खाद, सीवेज स्लज और पेपर मिल के बायप्रोडक्‍ट शामिल हैं। माइक्रोसॉफ्ट इस कचरे को जमीन में हजारों फीट नीचे दबा देगी। इससे मीथेन और CO₂ जैसी ग्रीनहाउस गैसें वातावरण में नहीं जाएंगी। माइक्रोसॉफ्ट इस पूरे प्रोजेक्ट पर 1.7 अरब डॉलर (करीब 14,690 करोड़ रुपये) खर्च करेगी। कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 तक वह कार्बन नेगेटिव बन जाए। इसका मतलब है कि वह वातावरण से जितना कार्बन उत्सर्जित करती है, उससे ज्यादा कार्बन हटाएगी।

माइक्रोसॉफ्ट ने 'वॉल्टेड डीप' नाम की स्टार्टअप के साथ एक बड़ा सौदा किया है। यह सौदा कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए है। 'वॉल्टेड डीप' कंपनी 2023 में शुरू हुई थी। यह कंपनी गंदे और बेकार जैविक कचरे को जुटाती है। इस कचरे में खाद, सीवेज स्लज और पेपर मिल के बायप्रोडक्‍ट शामिल हैं। कंपनी इस कचरे को जमीन में 5000 फीट नीचे पाइप के जरिए डालती है। जमीन के नीचे कचरा सड़ना बंद हो जाता है। इससे मीथेन और CO₂ जैसी गैसें वातावरण में नहीं फैलतीं।

क‍िसी काम का नहीं होता यह कचरा

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय-बर्कले के असिस्‍टेंट प्रोफेसर डेनियल सांचेज ने कहा, 'यह वह गंदा कचरा है, जिसका हमारे पास कोई दूसरा उपयोग नहीं है। वे इसे जमीन के नीचे स्थायी रूप से जमा करना चाहते हैं।' सांचेज बायोमास सिस्टम के विशेषज्ञ हैं। यह सिस्टम वातावरण से CO₂ को हटाता है। उनके अनुसार, यह तरीका बहुत ही आसान है।'वॉल्टेड डीप' का तरीका सिर्फ ग्रीनहाउस गैसों को ही कम नहीं करता है, बल्कि यह मिट्टी और पानी को दूषित होने से भी बचाता है। माइक्रोसॉफ्ट इसी दोहरे फायदे की वजह से इस कंपनी में निवेश कर रही है।

माइक्रोसॉफ्ट ने क्‍यों उठाया है यह कदम?

माइक्रोसॉफ्ट आजकल ऊर्जा की बहुत खपत कर रही है। खासकर एआई के काम में उसे बहुत ऊर्जा लग रही है। इससे उसका कार्बन उत्सर्जन बढ़ा है। 2020 से 2024 के बीच कंपनी ने 755 लाख टन CO₂ उत्सर्जित किया। माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य है कि 2030 तक वह कार्बन नेगेटिव बन जाए। 2050 तक वह जितना कार्बन उत्सर्जित करती है, उससे ज्यादा कार्बन हटा दे। इस लक्ष्य को पाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट कई नई तकनीकों पर काम कर रही है।

'वॉल्टेड डीप' का प्रोजेक्ट भी इन्हीं तकनीकों में से एक है। माइक्रोसॉफ्ट पनामा में फिर से जंगल लगा रही है। नॉर्वे में कचरा जलाने से निकलने वाले धुएं को पकड़कर उत्तरी सागर के नीचे जमा कर रही है। ब्रायन मार्स माइक्रोसॉफ्ट के ऊर्जा और कार्बन हटाने के सीनियर डायरेक्‍टर हैं। उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने 'वॉल्टेड डीप' में इसलिए निवेश किया है क्योंकि इसके कई फायदे हैं। उन्होंने कहा, 'वॉल्टेड डीप कचरा प्रबंधन कंपनी है जो अब कार्बन डाइऑक्साइड हटाने वाली कंपनी बन गई है।'

बहुत अलग तरह से हुई वॉल्‍टेड डीप की शुरुआत

'वॉल्टेड डीप' की शुरुआत भी बहुत अलग तरीके से हुई। कंपनी के सह-संस्थापक जूलिया रीचेलस्टीन और उमर अबू-सईद ने कभी कार्बन हटाने वाली कंपनी शुरू करने के बारे में नहीं सोचा था। अबू-सईद के पिता ने सबसे पहले तेल क्षेत्र के कचरे को ठिकाने लगाने के लिए जमीन के नीचे इंजेक्शन लगाने की तकनीक विकसित की थी। बाद में उमर ने इसे एडवांटेक कंपनी के तहत व्यवसायिक रूप दिया। उन्होंने लॉस एंजिल्स के एक अपशिष्ट जल सुविधा से बायोस्लरी पर काम किया।

आज, यह कंपनी लॉस एंजिल्स के लगभग 20 फीसदी बायोसोल्ड्स का प्रबंधन करती है। इसने हचिंसन, कंसास में एक नया प्लांट भी खोला है। यह प्लांट कृषि और नगरपालिका के कचरे से चलता है। उम्मीद है कि यह प्लांट पूरी क्षमता से चलने पर सालाना 50000 टन कार्बन हटाएगा।

दुनिया के कुछ हिस्सों में, खासकर यूरोप में, कचरे को बायोगैस में बदल दिया जाता है। लेकिन, उत्तरी अमेरिका में ऊर्जा के दोबारा इस्तेमाल के लिए ज्यादा सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए 'वॉल्टेड डीप' की रणनीति यहां ज्यादा कारगर है। इस प्रक्रिया में सामान्य ड्रिलिंग का इस्तेमाल होता है। इसमें कोई महंगी और नई तकनीक नहीं लगती है। इसलिए इसे डायरेक्ट एयर कैप्चर जैसे विकल्पों की तुलना में कम जोखिम वाला और सस्ता माना जाता है।

सांचेज ने कहा कि कचरा जुटाने और जमा करने में अभी लगभग 150 डॉलर प्रति टन का खर्च आता है। लेकिन, कचरा सुविधाओं के साथ मिलकर काम करने से कीमतें और भी कम हो सकती हैं। इस प्रकार, माइक्रोसॉफ्ट मानव अपशिष्ट के जरिये कार्बन हटाने के एक नए और आशाजनक तरीके में निवेश कर रही है। यह न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकता है। अलबत्‍ता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान कर सकता है।


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