
इसके लिए प्रमुख स्थानों पर सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे। शाही सवारी में करीब 85 दल शामिल रहेंगे। इन सब के बीच भगवान की पालकी किस क्रम पर रहेगी, इसकी सूची भी बनाई जा रही है। शाही सवारी में भीड़ नियंत्रण, भक्तों को सुविधा से भगवान महाकाल के दर्शन कराने तथा निर्धारित समय पर पालकी को पुन: मंदिर पहुंचाने के लिए प्रशासन मिनट टू मिनट कार्यक्रम तय कर रहा है।
महाकालेश्वर मंदिर से परंपरा अनुसार दोपहर चार बजे शाही सवारी की शुरुआत होगी। अवंतिकानाथ करीब छह घंटे नगर भ्रमण करेंगे। रात 10 बजे पालकी के मंदिर पहुंचने का समय निर्धारित है। पूर्व में कई बार भीड़ की अधिकता, सवारी में शामिल दलों के धीमी गति से चलने आदि कई कारणों से पालकी रात 10.30 बजे के बाद मंदिर पहुंची है।
प्रशासन इस बार पालकी को तय समय पर मंदिर पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। इसके अनुसार पालकी को चलाया जाएगा। इसका एक फायदा यह होगा कि जो भक्त केवल भगवान महाकाल के दर्शन करना चाहते हैं, वे तय समय पर निर्धारित स्थान पर पहुंचकर भगवान के दर्शन कर सकेंगे, उन्हें पालकी के इंतजार में घंटों मार्ग में खड़े नहीं रहना पड़ेगा। इस व्यवस्था का सबसे अधिक फायदा दिव्यांग व वृद्ध श्रद्धालुओं को होगा।