सुप्रीम कोर्ट बोला-चुनिंदा मामलों में ही जमानत पर रोक लगे

Updated on 23-07-2024 02:21 PM

सु्प्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कोर्ट के पास बेल ऑर्डर पर स्टे लगाने का अधिकार होता है, लेकिन यह स्टे सिर्फ असामान्य मामलों और असाधारण परिस्थितियों में ही लगाना चाहिए।

जस्टिस अभय सिंह ओका और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने यह टिप्पणी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी परविंदर सिंह खुराना की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

दरअसल, खुराना को ED ने 2023 में गिरफ्तार किया था। ट्रायल कोर्ट से जून 2023 में बेल मिल गई थी, जिसके खिलाफ ED ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के बेल ऑर्डर पर स्टे लगा दिया था।

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के खिलाफ खुराना ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि एक साल तक एक शख्स बिना किसी कारण के जेल में सड़ रहा है।

ED बोली- आरोपी देश छोड़कर भाग जाते हैं
मामले की पिछली सुनवाई 11 जुलाई को हुई थी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ED के वकील से सवाल किया था कि ट्रायल कोर्ट ने 2023 में बेल ऑर्डर दे दिया था। आप इसका विरोध क्यों कर रहे हैं।

इस पर ED के वकील ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने सभी फैक्टर को ध्यान में रखकर फैसला नहीं सुनाया था। मामले से कई जजों ने अपने आप को भी अलग कर लिया था। खुराना पर बहुत बड़ी रकम की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि जमानत पर रिहा होने पर आरोपी के देश से फरार होने की संभावना है। एक बार जब आरोपी बाहर हो जाता है, तो जमानत की शर्तों का कोई मतलब नहीं रह जाता।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जमानत पर रोक केवल बहुत ही दुर्लभ मामलों में लगाई जा सकती है। अगर आरोपी पर आतंकवाद, देशद्रोह या NIA के केस हो तो बेल पर रोक लगाई जा सकती है।

केजरीवाल की जमानत पर भी हाईकोर्ट ने स्टे लगाया था

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने बेल ऑर्डर पर स्टे लगा दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने बेल का फैसला देते हुए विवेक का इस्तेमाल नहीं किया।

150 वकीलों की CJI को चिट्ठी, कहा- केजरीवाल की जमानत रोकना चिंताजनक
दिल्ली हाईकोर्ट और जिला कोर्ट्स के 150 वकीलों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ को एक पत्र लिखकर दिल्ली CM अरविंद केजरीवाल की जमानत रोके जाने पर चिंता जाहिर की थी। वकीलों ने अपने पत्र में इसे ‘अनोखी परंपरा’ बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसा वाकया भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया है।

9 पेज के लेटर में वकीलों ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत दे दी थी, लेकिन ED ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और हाईकोर्ट ने जमानत के आदेश पर रोक लगा दी। यह पत्र चीफ जस्टिस को इस हफ्ते की शुरुआत में भेजा गया था। पत्र लिखने वाले वकीलों में आम आदमी पार्टी की लीगल सेल के कई वकील भी शामिल थे। 



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