
जनता के विरोध के बाद आखिरकार सरकार ने हरियाली उजाड़कर मंत्री, विधायकों के बंगले बनाने की योजना रद्द की। अब प्रोजेक्ट के लिए नई जगह तलाशेंगे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि शहर की प्राइम लोकेशंस की सैकड़ों एकड़ जमीन पर हजारों अवैध झुग्गियां हैं। ऐसा प्लान बने कि इनको मकान बनाकर दे दिए जाएं, खाली जमीन पर नेता-अफसरों के आवास बन जाएं।
राजभवन से सटे इलाके में दिख रही रोशनपुरा बस्ती 17 एकड़ में फैली है। बाणगंगा, भीमनगर, विश्वकर्मा नगर जैसी टॉप 8 झुग्गी बस्तियों को ही देखें तो शहर के बीच प्राइम लोकेशंस पर करीब 300 एकड़ में ये फैली हैं।
इनके अलावा राहुल नगर, दुर्गा नगर, बाबा नगर, अर्जुन नगर, पंचशील, नया बसेरा, संजय नगर, गंगा नगर, बापू नगर, शबरी नगर, ओम नगर, दामखेड़ा, उड़िया बस्ती, नई बस्ती, मीरा नगर जैसी कुल 388 बस्तियां शहर में हैं। इन सबकी जमीन का हिसाब लगाएं तो यह करीब 1800 एकड़ के आसपास बैठती है। इनमें से ज्यादातर पॉश इलाकों में ही हैं। अर्बन प्लानर प्रवीण भागवत का कहना है कि झुग्गी में रह रहे जरूरतमंद लोगों को पक्के आवास देकर यहां मंत्री-विधायकों के लिए मकान बनाए जा सकते हैं।
भोपाल में नहीं कटेंगे 29 हजार पेड़
भोपाल में 29 हजार पेड़ काटकर मंत्री-विधायकों के बंगले बनाने की योजना सरकार ने कैंसिल कर दी है। मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने आदेश जारी कर कहा है कि प्रस्ताव को निरस्त कर वैकल्पिक स्थान का परीक्षण किया जा रहा है।