
बड़े तालाब के संरक्षण के लिए अलग-अलग स्तर पर 30 साल में 400 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। इसमें गाद निकालने से लेकर गाद आने से रोकने तक पर योजनाएं बनीं। तालाब की हदें नापने से लेकर अतिक्रमण रोकने तक पर पैसा बहाया जा चुका है। इसके बाद भी स्थिति बिगड़ती जा रही है।
एक्सपर्ट कहना है कि कोलांस से लेकर बड़े तालाब तक 361 वर्ग किलोमीटर के कैचमेंट और 36 वर्ग किमी के तालाब को एक यूनिट मानकर प्लान बनाना जरूरी है। अब पर्यावरण मंत्री नागर सिंह चौहान ने एक अथॉरिटी बनाने की बात कही है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भोपाल नगर निगम, भोपाल जिला पंचायत और सीहोर जिला पंचायत अलग-अलग काम करते हैं, इनका आपस में समन्वय नहीं है।
नियम तो पहले से हैं, लेकिन क्रियान्वयन पर गंभीरता नहीं
स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी की सिफारिश पर केंद्र के वेटलैंड रुल्स 2017 को आधार बनाकर मप्र के पर्यावरण विभाग ने 16 मार्च 2022 को आदेश जारी कर कोलांस, सहायक नाले और बड़े तालाब के संरक्षण के लिए किन गतिविधियों को किस सीमा तक अनुमति दी जानी है वह तय कर दिया है। लेकिन कोई भी इसे लेकर गंभीर नहीं है।
भोपाल व सीहोर के नेताओं व अफसरों से चर्चा करेंगे
बड़े तालाब के संरक्षण के लिए सरकार ऐसी अथॉरिटी बनाएगी जो बड़े तालाब और कैचमेंट के संरक्षण का काम करेगी। भोपाल व सीहोर जिले के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से चर्चा कर अथॉरिटी का सेटअप बनाया जाएगा। -नागर सिंह चौहान, पर्यावरण मंत्री, मप्र
एक्सपर्ट व्यू - डॉ. प्रदीप नंदी, नेशनल सेंटर फॉर ह्यूमन सेटलमेंट एंड एनवायर्नमेंट के डीजी
पूरे इलाके को एक यूनिट मानकर प्लान करना होगा
बड़े तलाब से बमुलिया की समुद्र तल से ऊंचाई 524 मीटर है, जबकि बड़े तालाब की समुद्र तल ऊंचाई 508 मी. है। बारिश का पानी बमुलिया से होकर भोपाल तक आएगा ही। इस पूरे इलाके को एक यूनिट मानकर प्लान करना होगा। नदी में मिलने वाले पानी के हर सोर्स का प्लान तैयार करना होगा। पानी रोककर गांव के लिए कैसे उपयोगी हो, मिट्टी का कटाव को रोकते हुए बड़े तालाब में गाद-सीवरेज नहीं मिलने देने तक प्लानिंग एक साथ करनी होगी।