
हर तरह की रिकॉर्डिंग लिए ऐप में अलग विकल्प चुनना होता है। उदाहरण के तौर पर घटनास्थल, पीड़ित और साक्षी की रिकॉर्डिंग के लिए अलग-अलग विकल्प रहेगा। यह रिकॉर्डिंग उसी विकल्प के नाम से पुलिसकर्मी की लाग इन-पासवर्ड से डिजी लाकर में सुरक्षित हो जाएगी, जिसे बाद में आवश्यकता के अनुसार देखा जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त ऑनलाइन समन भी भेजे जाने लगे हैं। नए कानून प्रभावी होने के साथ प्रदेश में हर जगह इसका उपयोग शुरू हो गया है। कोर्ट से थानों को समन ऑनलाइन आ रहे हैं। जिन आरोपियों या गवाहों के मोबाइल नंबर या मेल आईडी उपलब्ध हैं, उन्हें थाने से भी व्हाट्सएप या मेल से समन भेजे जा रहे हैं।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक चंचल शेखर ने दावा किया है कि ई-साक्ष्य व्यवस्था को अपनाने में मध्य प्रदेश देश में अव्वल रहा है। दरअसल, पुराने कानूनों में बदलाव के बाद भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत डिजिटल साक्ष्य को मान्य किया गया है। इसी कड़ी में सभी राज्यों को ई-साक्ष्य एप्लीकेशन पर वीडियो और फोटो के साथ जानकारी अपलोड करनी है।
प्रदेश में विवेचना अधिकारियों ने अपने मोबाइल पर यह एप्लीकेशन इंस्टॉल किया है। घटना स्थल की रिकार्डिंग, घटना स्थल की गूगल लोकेशन, शिकायतकर्ता, आरोपित और साक्ष्य देने वाले के बयान का वीडियो अपलोड करने के बाद विवेचना अधिकारी घटनास्थल से ही अपनी सेल्फी अपलोड करेंगे।
प्रदेश के सभी थानों में मिलाकर लगभग 25 हजार विवेचना अधिकारी हैं, जिन्हें नए कानून प्रभावी होने के पहले ही ई-साक्ष्य के बारे में प्रशिक्षित किया गया था। इस वर्ष अंत तक इन्हें टैबलेट देने की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार बजट की तंगी के चलते टैबलेट खरीदी में देरी हो रही है। स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अधिकारियों ने बताया कि राज्यों के सुझाव पर एनसीआरबी ने ई-साक्ष्य एप्लीकेशन में कुछ बदलाव भी किए हैं।