पूर्वोत्तर भारत में रहने वाले 5800 यहूदियों को इजरायल कैसे लेकर जाएगी नेतन्याहू सरकार, बन गया प्लान, जानें एक-एक बात

Updated on 26-11-2025 01:55 PM
तेल अवीव: इजरायल की बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने पूर्वोत्तर भारत में रहने वाले 5800 यहूदियों को यहां से ले जाने की योजना बनाई है। रविवार को उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई, जिसके तहत अगले 5 सालों से इस इलाके से सभी यहूदियों को इजरायल ले जाया जाएगा। इजरायली यहूदी एजेंसी ने इस बारे में जानकारी दी है। भारत के उत्तर पूर्व हिस्से से जिन यहूदियों को ले जाने की योजना बनाई गई है, उन्हें बनी मेनाशे के नाम से जाना जाता है। एजेंसी ने बताया कि इस ऐतिहासिक फैसले से साल 2030 तक बनी मेनाशे समुदाय के लगभग 5800 सदस्य इजरायल आ जाएंगे, जिनमें 2026 में पहले से मंजूर 1200 सदस्य शामिल हैं।

यह पहली बार होगा जब ज्यूइश एजेंसी पूरे प्री-इमिग्रेशन प्रोसेस को लीड करेगी, योग्य अभ्यर्थियों के लिए फ्लाइट की व्यवस्था करेगी और इजरायल में उन्हें बसने में मदद करेगी। इस पूरे प्रोसेस के लिए और दूसरे स्पेशल बेनिफिट्स के खर्च को कवर करने के लिए 9 करोड़ इजरायली शेकेल यानी लगभग 2.7 करोड़ डॉलर की लागत का अनुमान है।

भारत आएगा यहूदी रब्बियों का डेलीगेशन

बनी मेनाशियों को वापस ले जाने की प्रक्रिया के लिए रब्बियों (इजरायली धर्मगुरु) का एक प्रोफेशनल और बड़ा प्रतिनिधिमंडल भारत के लिए रवाना होने की उम्मीद है। घोषणा में कहा गया कि यह अब तक का भेजा गया सबसे बड़ा डेलीगेशन होगा और एक दशक से ज्यादा समय में पहला होगा। प्रतिनिधि मंडल समुदाय के पहले आधे हिस्से लगभग 3000 बनी मेनाशे का इंटरव्यू लेगा, जिनके इजरायल में फर्स्ट डिग्री रिश्तेदार हैं।

इजरायल में कहां बसाया जाएगा?

इस समुदाय के 1200 सदस्यों को पहले ही इजरायली में बसाए जाने की मंजूरी मिल चुकी थी, जिसमें ज्यादातर को शुरुआत में वेस्ट बैंक में बसाया गया था। हाल ही में उन्हें उत्तरी इजरायल के शहरों में भेजा गया है। इसमें नोफ हगालिल एक खास जगह है, जो नाजरेथ के पास मिली-जुली आबादी वाला यहूदी-अरब शहर है। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, आगामी वर्षो में भारत से आने वाले हजारों लोगों को यही बसाया जाएगा।

कौन हैं बनी मेनाशे?

बनी मेनाशे उन यहूदियों को कहा जाता है जो पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर और मिजोरम क्षेत्रों में रहते हैं। लंबे समय तक इस समुदाय को यहूदी के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता था, लेकिन 2005 में तत्तकालीन चीफ रब्बी ने उन्हें इजरायल के वंशज के तौर पर मान्यता दी। समुदाय खुद को मेनाशे जनजाति का बताता है। यह उन 10 जनजातियों में से है, जिसे 2700 साल पहले असीरियन लोगों देश से खदेड़ दिया था। समुदाय के लगभग 2500 सदस्य पहले से ही इजरायल में रहते हैं।

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