ये पीढ़ी क्या जाने रोमांच की हद... चैंपियंस ट्रॉफी के लिए सरहद पार पाकिस्तान जाने में क्या हर्ज
Updated on
28-11-2024 02:47 PM
क्रिकेट जगत में फिलहाल बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी (BGT) की ही सबसे ज्यादा चर्चा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली इस टेस्ट सीरीज को रोमांच के मीटर पर सबसे ऊपर रखा जाता है। इस मामले में यदि कोई और सीरीज BGT को पीछे छोड़ सकती है, तो वह है भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली सीरीज। लेकिन बदकिस्मती से मौजूदा दौर के क्रिकेट प्रेमी रोमांच की हद से वाकिफ नहीं हैं।
फैंस करेंगे स्वागत ऐसा इसलिए क्योंकि खेल और आतंक एक साथ नहीं चल सकते। भारत सरकार का यह स्पष्ट विचार है और इसी के तहत भारत ने 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमलों के बाद से पाकिस्तान से द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध खत्म कर दिए हैं। हालांकि अभी भारत-पाक क्रिकेट उसी बिंदु पर है, जहां से नई शुरुआत की जा सकती है। सामान्य हो संबंध पाकिस्तान में अगले साल ICC चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन होना है और यदि भारतीय क्रिकेट टीम इवेंट में हिस्सा लेने के लिए सीमा पार जाती है, तो शायद ही किसी खेल प्रेमी को इससे कोई दिक्कत होगी। यदि पाकिस्तानी टीम को भारत में आने की इजाजत है, यदि किसी न्यूट्रल वेन्यू पर दोनों टीमों के आपस में मैच खेलने पर कोई आपत्ति नहीं, यदि दूसरे खेल चल सकते हैं, तो फिर क्रिकेट संबंधों को सामान्य करने से भी कोई मसला पैदा नहीं होना चाहिए। वह पहला दौरा 1965 से पहले भारत और पाकिस्तान खेल के मैदान पर कई बार आमने-सामने हुए। विभाजन की कड़वाहट का असर उस वक्त कभी मैदान पर देखने को नहीं मिला। 1952 में पहली बार दोनों देशों की क्रिकेट टीमें भिड़ी थीं। 1946 में इंग्लैंड दौरे पर अविभाजित भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके अब्दुल हाफिज करदार अब पाकिस्तानी टीम के कप्तान थे। दोनों देशों के बीच पहला टेस्ट मैच दिल्ली में खेला गया था। तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन किया।
विरोध तब भी हिंदू संगठन ने उस सीरीज का विरोध किया, मैच में खलल डालने की भी कोशिश की, लेकिन पूरी सीरीज के दौरान खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का उत्साह चरम पर रहा। शृंखला का एक और मुकाबला नागपुर में खेला गया। वहां हिंदू महासभा ने कहा कि वह स्टेडियम के बाहर विरोध करेगी और खेल रोकने की हर संभव कोशिश करेगी। इसके बावजूद हर दिन स्टेडियम खचाखच भरा नजर आया।
पहला विराम 1965 में भारत-पाक युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच खेल संबंध पर भी विराम लग गया। करीब 5 साल दोनों ने एक दूसरे के यहां कोई भी खेल नहीं खेला। 1970 में डेविस कप के जरिए एक बार फिर खेल संबंध स्थापित हुए। तब पाकिस्तानी टेनिस टीम भारत आई थी। हालांकि यह संबंध 2 बरसों में ही खत्म हो गया, जब 1972 में एक और युद्ध छिड़ा। फिर 1978 में क्रिकेट और हॉकी की द्विपक्षीय शृंखला के जरिये रिश्ते सुधारने की कोशिश हुई थी। मौजूदा गतिरोध 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद से है।
लंबा गैप करीब 17 साल से दोनों पड़ोसियों ने आपस में कोई द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेली। इस दौरान क्रिकेट की पूरी पीढ़ी बदल चुकी है। सचिन तेंडुलकर, वीरेंद्र सहवाग, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण, युवराज सिंह जैसे सितारे वो आखिरी भारतीय खिलाड़ी थे, जिन्हें पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट खेलने का मौका मिला। इनके बाद आई विराट कोहली, रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के टेस्ट रिकॉर्ड में पाकिस्तान के खिलाफ एक भी मैच दर्ज नहीं है।
अधूरा रिकॉर्ड शायद बहुत लोगों ने गौर नहीं किया होगा कि विराट कोहली ने आज तक पाकिस्तान के खिलाफ एक भी टेस्ट नहीं खेला। यानी यह भी कहा जा सकता है कि उनके टेस्ट कौशल की पूरी परीक्षा अभी तक नहीं हुई है। जरा सोचिए, भविष्य में जब विराट कोहली और उनके समकक्ष जो रूट, स्टीव स्मिथ व केन विलियम्सन जैसे दिग्गजों के बीच तुलना होगी, तो विराट के आंकड़ों में कुछ ऐसी कमी रहेगी, जो उन्हें बाकियों से पीछे कर देगी।
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