
मध्यप्रदेश विधानसभा में सात साल पहले मंत्रियों की ओर से सवाल के जवाब देने के लिए दिए गए आश्वासन अभी तक पेंडिंग हैं। अकेले जल संसाधन विभाग के ही 113 सवालों के जवाब में दिए गए आश्वासन पर सरकार की ओर से अभी तक विधानसभा को अवगत नहीं कराया गया है। इसमें वर्ष 2017 में दिए गए कई आश्वासन भी शामिल हैं।
इसे देखते हुए अब विधानसभा सचिवालय ने जल संसाधन विभाग को लंबित आश्वासनों की सूची भेजी है और इसका जल्द से जल्द जवाब भेजने को कहा है। यह विभाग 2020 में कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद से अब तक मंत्री तुलसी सिलावट के पास है।
सवाल करने वाले कई विधायक 2018 का चुनाव हारने के बाद 2023 में फिर विधायक बन गए हैं जिसमें मुकेश नायक भी शामिल हैं। वहीं, कुछ विधायक पिछले चुनाव में हार के कारण अब पूर्व विधायक बन गए हैं।
केस -1: पन्ना में बांध टूटने पर उठा था सवाल
पन्ना जिले में बांध टूटने के कारण और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध जांच को लेकर विधानसभा में सवाल उठा था जिसमें ठेकेदार मेसर्स त्रिशूल कंस्ट्रक्शन जबलपुर से खर्च हुई राशि की वसूली होनी थी। इस मामले में सरकार ने विधानसभा में आश्वासन दिया था कि विभागीय जांच की जा रही है, और ठेकेदार के विरुद्ध निलंबन की कार्यवाही के लिए मुख्य अभियंता धसान केन कछार सागर द्वारा नोटिस जारी किया है।
कार्यपालन यंत्री पन्ना ने सिरस्वाहा तालाब निर्माण का एग्रीमेंट अमान्य कर दिया है, और ठेकेदार से राशि की वसूली की जाएगी।
फरवरी मार्च 2017 में विधानसभा सत्र के दौरान दिए गए मंत्री के आश्वासन का जवाब अब तक विधानसभा तक नहीं पहुंच सका है। यह बांध 2016 की बारिश में टूटा था और चार गांवों की बस्तियां जल मग्न हो गई थीं।
केस-2: दुधारिया नदी पर सिंचाई परियोजना
शहडोल जिले के ब्यौहारी तहसील के ग्राम बिजहा में दुधारिया नदी पर सिंचाई परियोजना में किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है लेकिन मुआवजा नहीं दिया है। किसानों की 70.181 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण का यह मामला पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला ने मार्च 2017 के विधानसभा सत्र में उठाया था। इसका जवाब भी विधानसभा को सरकार अब तक नहीं दे सकी है।
केस-3: बांध निर्माण और नहर निर्माण में अनियमितता
पन्ना जिले में बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत बांध निर्माण और नहरों को बनाने में अनियमितता का मामला विधायक मुकेश नायक ने मार्च 2017 में उठाया था। मंत्री ने आश्वासन दिया था कि कार्यपालन यंत्री और अनुविभागीय अधिकारी व उपयंत्री को सस्पेंड किया है। उनकी विभागीय जांच चल रही है। इस मामले में आगे की कार्रवाई से विधानसभा को अवगत नहीं कराया है।
मुकेश नायक ने एक अन्य मामला पन्ना के बिलखुरा और सिरस्वाहा बांध टूटने का उठाया था। जिस पर 2 करोड़ रुपए खर्च हुए थे, और अफसरों पर कार्रवाई के बाद जानकारी देने के लिए कहा था। मार्च 2018 के सवाल पर दिए गए आश्वासन का जवाब अब तक विधानसभा को नहीं भेजा है।
केस-4: सड़क निर्माण के ई-टेंडर में गड़बड़ी
प्रदेश में सड़क निर्माण के ई-टेंडर में हुई गड़बड़ी और अनियमितता का मामला विधायक हर्ष विजय गहलोत ने अगस्त 2021 में विधानसभा सत्र में उठाया था। इस पर जांच जारी होने और कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने की जानकारी दी गई लेकिन इसके बाद आगे की कार्यवाही को लेकर दिए गए आश्वासन का जवाब विधानसभा नहीं पहुंचा है।