
देश की चार सेल्यूलर कंपनियों ने मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (ट्रांसको) द्वारा ट्रांसमिशन लाइनों में बिछाई गई डार्क फाइबर को किराए पर ले लिया है। जंगल, दुर्गम इलाकों, पहाड़ों पर लगी ट्रांसमिशन कंपनी की लाइनों के ऑप्टिकल ग्राउंड वायर की 8(4 पेयर) डार्क फाइबर लीज पर दी गई हैं। इससे दूरदराज के इलाकों में भी 5जी इंटरनेट कनेक्टिविटी मिलने लगेगी। इन चारों कंपनियों ने लीज पर यह सुविधा ओपन टेंडर के द्वारा प्राप्त की है।
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि ट्रांसको ने नियामक आयोग के समक्ष अपनी ट्रांसमिशन लाइन की आठ डार्क फाइबर को लीज पर देने के लिए अनुमति मांगी थी। इस पर सुनवाई के बाद आयोग से कंपनी को इसकी परमिशन मिल गई है। मप्र में 3 करोड़ से ज्यादा एंड्रॉइड मोबाइल यूजर्स हैं। सैकड़ों दफ्तरों और घरों में भी इससे 5G इंटरनेट ब्रॉड बैंड की स्पीड बढ़ जाएगी।
फैक्ट फाइल
इस तरह समझें... क्या है ओपीजीडब्ल्यू
ट्रांसको के एमडी सुनील तिवारी ने बताया कि ऑप्टिकल ग्राउंड वायर (ओपीजीडब्ल्यू) केबल है। केबल के भीतर ऑप्टिकल फाइबर के बीच जो हाई स्पीड डेटा होता है, उसे इंटर-कनेक्शन के लिए तीसरे पक्ष को बेचा जा सकता है। ट्रांसको ने 11 हजार किमी पावर ट्रांसमिशन लाइन में अभी 24 पेयर फाइबर लगाए हैं। ट्रांसमिशन लाइन में तीन तार फेस के लिए और एक अर्थिंग के लिए होता है। इस तार के ऊपर से अर्थिंग का काम हो जाएगा इसके बीच में हमने ऑप्टिकल फाइबर केबल डाली है। इसी से डाटा कम्युनिकेट होगा। इससे कंपनी को साल में 70 करोड़ की आय होगी।
डाटा की रफ्तार का गणित... डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम के रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल महेश शुक्ला बताते हैं कि 5G टेक्नोलॉजी में डाटा की रफ्तार एक गीगा प्रति सेकंड तक होती है। 1 गीगा बाइट (जीबी) मतलब 1000 एमबीपीएस प्रति सेकंड। ऑप्टिकल फाइबर 10 जीबीपीएस के हिसाब से डाटा संचारित करने के लिए सक्षम होती है।
3G से 5G तक की स्पीड