ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया के सामाजिक कार्यकर्ता भगवान सिंह राजपूत ने जांच एजेंसी को शिकायत की थी कि कंपनी फर्जी दस्तावेज तैयार कर अमानक सामग्री की सप्लाई कर रही है। ईओडब्ल्यू की पड़ताल में यह जानकारी सही मिलने पर चार दिन पहले ही मामले में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग के संबंध में प्रकरण कायम किया था।
इस आधार पर बुधवार को सीहोर जिला न्यायालय की अनुमति के बाद कंपनी के कारखाने और अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई। जांच एजेंसी ने भोपाल में बघीरा अपार्टमेंट और सीहोर स्थित कंपनी के आवास और कारखाने में संचालित कंपनी के कार्यालय में भी छापा डाला। यहां से दस्तावेजों के अतिरिक्त 20 से अधिक कंप्यूटरों में सुरक्षित दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने यहां से खाद्य पदार्थों के सैंपल भी लिए हैं, जिनकी जांच से पता चलेगा कि तैयार सामग्री की गुणवत्ता कैसी है।
तीन लैब के 27 प्रमाण पत्र फर्जी मिले
शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू की टीम ने लैब के गुणवत्ता प्रमाण पत्र कंपनी से एकत्र किए थे। यह प्रमाण पत्र संबंधित लैब को भेजे गए। तीन लैब ने ये अपने यहां से जारी होने से साफ इन्कार कर दिया। ऐसे 27 प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं। कंपनियों ने जांच एजेंसी को बताया कि ये प्रमाण पत्र तो उन्होंने किसी और कंपनी को जारी किए थे।
पहले भी अलग-अलग एजेंसियां कर चुकी हैं कार्रवाई
यह कंपनी पिछले ढाई वर्ष से विवादों में रही है। जनवरी 2022 में प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने मानक पूरा नहीं करने के कारण कारखाने को बंद करने के निर्देश दिए थे। दूषित पानी का निपटान ठीक से नहीं होने और इस पानी के उपचार के लिए परिसर के बाहर प्लांट नहीं बनाने के लिए मंडल ने यह कार्रवाई की थी। इसके बाद मार्च 2022 में पाइप लाइन बिछाने के लिए दो किमी तक सड़क खोदने के कारण सीहोर कलेक्टर ने एफआइआर कायम कराई थी। जून 2022 में आयकर विभाग की टीम ने छापा मारा था। इसके बाद मार्च 2023 में खाद्य सुरक्षा विभाग ने पनीर में पाम आइल की मिलावट के संदेह में छापा मारा था। यहां कोलकाता से आया पाम आइल से भरा टैंकर जब्त किया गया था।