ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि कारखाने में छापे के दौरान ऐसे रासायनिक पदार्थ भी मिले हैं, जिनका उपयोग नहीं किया जा सकता है। ऐसे में आशंका है कि कहीं इनका उपयोग खाद्य उत्पाद बनाने के लिए तो नहीं किया जा रहा था। यह कंपनी पनीर सहित अधिकतर मिल्क उत्पाद बनाती है।
पहले भी विवादों में रही है कंपनी
यह कंपनी पिछले दो-ढाई वर्ष से विवादों में रही है। जनवरी 2022 में मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने मानक पूरा नहीं करने के कारण कारखाने को बंद करने के निर्देश दिए थे। दूषित पानी का निपटान ठीक से नहीं होने और इस पानी के उपचार के लिए परिसर के बाहर प्लांट नहीं बनाने के लिए मंडल ने यह कार्रवाई की थी। इसके बाद मार्च 2022 में पाइप लाइन बिछाने के लिए दो किमी तक सड़क खोदने के कारण सीहोर कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज कराई थी। जून 2022 में आयकर विभाग की टीम ने भी छापा मारा था। इसके बाद मार्च 2023 में खाद्य सुरक्षा विभाग ने पनीर में पाम आइल की मिलावट के संदेह में छापामार कार्रवाई की। यहां कोलकाता से आया पाम आइल से भरा टैंकर जब्त किया गया था।