डोनाल्ड ट्रंप का डबल स्टैंडर्ड, भारत पर लगाया टैरिफ, खुद रूसी तेल खरीदने के लिए कर रहे सौदेबाजी, अमेरिका ने की सीक्रेट डील

Updated on 27-08-2025 12:40 PM
वॉशिंगटन: इतिहास गवाह रहा है कि पश्चिमी देशों के दोगलेपन का कोई जवाब नहीं रहा है। जो पश्चिमी देश आज मानवाधिकार का ढोल पीटते हैं, सदियों तक उन्होंने उसी मानवाधिकार की खाल उधेड़ी है। जो पश्चिमी देश आज भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए भड़के हुए हैं, वो खुद रूसी ऊर्जा पर जिंदा है। वो डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर एक्स्ट्रा 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है, खुद उनके देश की कंपनी रूस की सबसे बड़ी कंपनी के साथ ऊर्जा सौदे पर सीक्रेट डील कर रही है। इस डबल स्टैंडर्ड का जवाब शायद ही कोई दे पाए, लेकिन निश्चित तौर पर अमेरिका के पास इसको लेकर दलील होगी, क्योंकि जिसकी लाठी उसकी भैंस।

वाल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है अमेरिका ने रूस के साथ ऊर्जा खरीद के लिए सौदेबाजी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अलास्का में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बैठक के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संवाददाताओं से कहा था कि रूस और अमेरिका मिलकर और भी व्यापार कर सकते हैं, उदाहरण के लिए, अपने प्रशांत तटरेखाओं के बीच। जिसपर ट्रंप ने जवाब दिया था कि "हम व्यापार करने के लिए उत्सुक हैं।" लेकिन दोनों नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर जो नहीं कहा वो ये था कि 'दोनों देशों की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों ने रूस के सुदूर पूर्वी तट पर तेल और गैस क्षेत्रों से तेल निकालकर आपसी व्यापार को फिर से बहाल करने का खाका पहले ही तैयार कर लिया था।'
अमेरिका का डबल स्टैंडर्ड देखिए
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा है कि अमेरिका की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में से एक, एक्सॉन मोबिल ने रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के साथ सीक्रेट बातचीत की है, जिसमें दोबारा कारोबार शुरू करने की योजना बनाई गई है। सबसे खास बात ये है कि ये गुप्त बातचीत खुद डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में की गई है। मतलब इससे बड़ा दोगलापन कुछ और क्या ही हो सकता है! इससे सवाल उठता है कि आखिर उस अमेरिका पर भारत भविष्य में कैसे भरोसा करे जिसने डबल स्टैंडर्ड की सारी हदें पार कर दी हैं। अमेरिका का 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ आज से भारत पर लागू हो चुका है। भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50 प्रतिशत हो चुका है, जिसका सीधा असर भारत के कारोबार पर पड़ने की आशंका है। अरबों डॉलर का व्यापार प्रभावित होने की आशंका है।
अमेरिका ने तर्क दिया है कि भारत के तेल खरीदने की वजह से रूस यूक्रेन में युद्ध लड़ रहा है और ये पश्चिमी देशों की भावना के खिलाफ है। लेकिन खुद अमेरिका रूसी कंपनी से ऊर्जा समझौता कर रहा है तो वो पश्चिमी देशों की भावना के खिलाफ क्या नहीं है? मतलब विडंबना देखिए, यही अमेरिका अब एक्सॉन मोबिल जैसी कंपनियों के जरिए रूस के सखालिन प्रोजेक्ट में वापसी की योजना बना रहा है। एक्सॉन पहले भी 1990 के दशक से रूस में काफी सक्रिय रहा और 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद उसे मजबूरी में रूस से बाहर आना पड़ा, लेकिन अब ये कंपनी फिर से रूस के साथ कारोबार करने वाली है। यानि अब अमेरिका, खुद उस रूसी तेल-गैस में हिस्सेदारी तलाश रहा है जिसे खरीदने पर उसने भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ ठोक दिया है।
ट्रंप प्रशासन ने पहले ही कारोबार को दे दी है हरी झंडी
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने खुलासा किया है कि अलास्का में पुतिन से डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात और उसके बाद एक्सॉन और रोसनेफ्ट की बातचीत से ये पता चलता है कि असल में वाइट हाउस ने अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को रूस में दोबारा निवेश करने की हरी झंडी पहले ही दे रखी थी। ट्रंप प्रशासन यह तर्क दे रहा है कि अगर शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो पश्चिमी देशों की कंपनियों को रूस में फिर से अपनी दुकान खोलने का मौका दिया जाएगा, ऐसे में सवाल यह है कि अगर यही करना है, तो फिर भारत के खिलाफ टैरिफ क्यों लगाए गये हैं? आखिर अमेरिका और भारत के लिए अलग अलग नीति क्यों है?

वाल स्ट्रीट जर्नल ने खुलासा किया है कि अमेरिका और रूस के बीच हुई यह बातचीत इतनी संवेदनशील थी कि एक्सॉन में कुछ ही लोगों को इस बातचीत के बारे में पता था। अमेरिकी तेल कंपनी के शीर्ष अधिकारियों में से एक, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नील चैपमैन ने एक्सॉन की तरफ से इस वार्ता का नेतृत्व किया था। बातचीत से परिचित एक व्यक्ति ने बताया है कि बाइडेन और ट्रंप प्रशासन के तहत, एक्सॉन और अन्य कंपनियों को रूसी समकक्षों के साथ फंसे हुए संपत्तियों के बारे में बातचीत करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग से अनुमति और लाइसेंस दी गई थी। बातचीत का पहला दौर 2022 में एक्सॉन के रूस से बाहर निकलने के तुरंत बाद हुआ था। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया है कि एक्सॉन के अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से कंपनी के रूस वापस जाने पर समर्थन मांगा है, और उन्हें सहानुभूतिपूर्वक इजाजत भी मिली है। खुलासा ये भी किया गया है कि सीईओ डैरेन वुड्स ने हाल के हफ्तों में वाइट हाउस में ट्रंप के साथ एक्सॉन की रूस में संभावित वापसी पर चर्चा की थी।


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